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अमेरिका में अश्वेत की मौतः शिक्षिका ने अपना जन्मदिन नहीं मनाया दी नम आंखों से अंतिम विदाई श्रद्धांजलि,

वाराणसी।पीएम के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में जार्ज फ्लॉयड को दी गयी श्रद्धांजलि,जॉर्ज फ्लॉयड को श्रद्धांजलि देते हुए इसको विनाशकारी बताया।
बुधवार,वाराणसी रोहनियां में कैंडल जलाकर दी जॉर्ज फ्लॉयड को श्रद्धांजलि लोगों ने इस घटना को विनाशकारी बताया और इसकी निंदा की मालूम हो कि 25 मई को पुलिस हिरासत में फ्लॉयड की मौत हुई थी।
जॉर्ज फ्लायड की हत्या ने दुनिया भर की पीड़ित कौमों को उनकी पीड़ा का अहसास करा दिया है। नतीजतन फ्लायड की हत्या के बाद शुरू हुआ विरोध-प्रदर्शनों का दायरा अमेरिका की सरहदों को तोड़कर विश्वव्यापी होता जा रहा है।दुनिया के तमाम देशों में लोग ‘ब्लैक लाइव्स मैटर’ आंदोलन को आगे बढ़ाने में जुट गए हैं।इसके तहत इस घटना के दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी अमेरिका सहित कई देशों में विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं।दलित फाउंडेशन के संस्थापक मार्टिन मेकवान ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को लिखा खुला पत्र
मार्टिन मेकववा ने ट्रंप को खुला पत्र जारी करके कहा कि जार्ज फ्लोइड का जीवंत (लाईव) विडियो देखकर आज पूरे अमेरिका के 75 से भी अधिक शहरों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। कई शहरों को सेना के अधीन होने के बावजूद और कर्फ्यू लगा हुआ होने के बावजूद भी हजारों लोगों की भीड़,महिला,पुरुषों और बच्चों के साथ-साथ अश्वेत और श्वेत सड़कों पर उतर आए हैं। दो हाथ जोड़कर माफी मांगने और जो गलत हुआ है उसके खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय, अमेरिकी राष्ट्र प्रमुख उन्हें सैन्य हमलों और ऐसे हथियारों के साथ सबक सिखाने की बात कर रहे हैं, जो लोगों ने पहले कभी न देखे हो !हमसे सहजता से ऐसा सवाल होता है कि हमें अमेरिका से क्या लेना-देना है ? इस लेन-देन की बात,हजारों लोगों के समर्थन युक्त ट्रम्प को लिखे इस खुले पत्र में कही गई है।खुले पत्र में बताया गया है कि कैसे आंबेड़कर जातिवाद,नश्लवाद और रंगभेद के प्रश्न को एकसाथ जोड़कर उसके खिलाफ लड़ना चाहते थे।
दुनिया में सबसे अमीर और सबसे विकसित अमेरिका देश में अश्वेत लोगों की दुर्दशा हमने टीवी स्क्रीन पर देखी है।ठीक उसी समय पिछले एक महीने से विकासशील भारत और दुनिया के आधुनिक सैन्य हथियारों से लैस भारत में सड़को पर पैदल चलते और सैंकड़ों अपने वतन पहुंचने के लिए कोशिश करते महिलाओं और पुरुषों, बच्चों एवं प्रसूती के नौवें महीने में भी चलती महिलाओं को हम देख रहे हैं, भारत में मानवाधिकार के मुद्दों को उठाने वालों को ‘अनलोफुल एक्टिविटी प्रिवेंशन एक्ट’ (गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम) के तहत अपराध के किसी भी सबूत के बिना कैद किए जा रहे हैं।इसमें प्रो. आनंद तेलतुम्बडे भी शामिल हैं।हम क्या कर सकते है? कोरोनोवायरस के कारण आम लोगों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है ऐसे माहौल में हम कोई सार्वजनिक कार्यक्रम करने में सक्षम नहीं हैं,क्योंकि अहमदाबाद स्टेडियम में डोनाल्ड ट्रम्प को बधाई देने के लिए और एक लाख लोगों को इकट्ठा करने के लिए जो बेहिसाबी धन इस्तेमाल किया गया ऐसा धन हमारे पास नहीं है।इस स्थिति में इस पत्र के माध्यम से जनता को जागरूक करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को एक खुला पत्र लिखकर दिनांक 10 जून,2020 को जॉर्ज फ्लॉइड का अंतिम संस्कार के दिन शाम 7 बजे अपने घर पर दिया या मोमबत्ती जलाकर हम उन सभी लोगों को याद कर रहे हैं, जिसका इस दुनिया में शोषक और अमीर लोग द्वारा अपनी सत्ता के बलबुत्ते पर लगातार अपमान किए जा रहे हैं इस खुले पत्र में हजारों लोगों ने अपना नाम जोड़कर खुले पत्र का समर्थन किया और कैंडल जलाकर श्रद्धांजलि भी अर्पित किया है।
बताते चलें कि सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक पर लोग इस घटना का विरोध कर रहे हैं और जॉर्ज को श्रद्धांजलि दे रहे हैं। अब भारत में भी पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में भी इस घटना की निंदा की है।
वाराणसी की शिक्षिका वंचित समुदाय के बच्चों को शिक्षित करने की बीड़ा उठाने वाली पूजा गुप्ता अपने जन्मदिन पर पुलिस बर्बरता के कारण एक अश्वेत अमेरिकी नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड की मौत से दुखी होकर अपना जन्मदिन नहीं मनाया और अपने आवास राजातालाब में कैंडल जलाकर श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्हें एहसास हुआ कि इस बारे में अगर कोई गलत चीज कही जा सकती है तो वो इस बारे में कुछ भी ना कहना होगा। उन्होंने कहा कि जॉर्ज फ्लॉयड की जिंदगी भी मायने रखती थी।
ये है पूरा मामला
मालूम हो कि हाल ही में अमेरिका में जो हुआ उसमें एक अमेरिकी पुलिस अधिकारी डेरेक कौविन ने आठ मिनट से अधिक समय तक घुटने से फ्लॉयड की गर्दन को दबाकर रखा था। इसका वीडियो भी सामने आया था जिसमें वो बार- बार कहते दिख रहे थे कि वो सांस नहीं ले पा रहे हैं, इसके बावजूद डेरेक कौविन ने जॉर्ज की गर्दन से घुटना नहीं हटाया। बता दें कि अश्वेत फ्लॉयड को एक दुकान में नकली बिल का इस्तेमाल करने के संदेह में गिरफ्तार किया गया था।
जॉर्ज के साथ हुई इस घटना का वीडियो सामने आया था जिससे लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। इसके बाद अमेरिका में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया और ज्यादातर लोगों के हाथों में प्लकार्ड्स पर- ‘I can’t breathe’ यानी ‘मुझे सांस नहीं आ रही है’ ही लिखा हुआ था। फ्लॉयड ने पुलिस अफसर डेरेक कौविन से अपने आखिरी वक्त में यही गुहार लगाई थी लेकिन पुलिसकर्मी ने उन्हें छोड़ा नहीं।
अश्वेत नागरिक जॉर्ज फ्लॉयड की पुलिस के हाथों मौत के बाद दुनिया भर में विरोध प्रदर्शन हुए और लोगों ने नस्लीय अन्याय का मुद्दा उठाया. ह्यूस्टन में मंगलवार को जॉर्ज फ्लॉयड का अंतिम संस्कार किया गया.
फ्लॉयड साधारण व्यक्ति थे लेकिन भाग्य द्वारा “एक आंदोलन की आधारशिला” में तब्दील हो गए. एक अश्वेत नागरिक की मौत के बाद अमेरिका में गुस्से का उबाल आ गया और कई राज्यों में हिंसा और आगजनी तक हुई. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक व्हाइट हाउस के बाहर विरोध प्रदर्शन के कारण एक बार राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप को भूमिगत बंकर में जाना पड़ा.
जॉर्ज फ्लॉयड की मौत के बाद अमेरिका में दो हफ्तों तक विरोध प्रदर्शन हुए. विरोध प्रदर्शन यूरोप तक पहुंच गए और रंगभेद के खिलाफ एक नई बहस छिड़ गई. 46 वर्षीय फ्लॉयड को पुलिस अधिकारी द्वारा घुटने के बल पर दबाने का वीडियो वहीं खड़े एक शख्स ने बनाया था और उसी वीडियो के कारण पुलिस की बर्बरता सामने आई थी. जब पुलिस अधिकारी ने फ्लॉयड को घुटने से दबाया था तब वे पुलिस से गुहार लगा रहे थे “मैं सांस नहीं ले पा रहा हूं.”
25 मई की घटना के बाद पुलिस अधिकारी डेरेक शोविन पर सेकंड डिग्री मर्डर का आरोप लगा और घटना के दौरान मौजूद तीन अधिकारियों को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया. फ्लॉयड की मौत के आखिरी शब्दों को नारा बनाते हुए हजारों लोगों ने कोरोना वायरस महामारी के डर के बिना कई शहरों में विरोध प्रदर्शन किए.,

रिपोर्ट राजकुमार गुप्ता वाराणसी

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