गाजीपुर न्यूज़ लेख

हवा के झोंकों से झूमते तरु,मखमली धानी चादर में लिपटी वसुधा : गीता राय,

कासीमाबाद गाजीपुर।वर्षा ऋतु का आगमन,चहुँओर फैली हरियाली बारिश की बूँदों संग नहाई हुई हरी घास,हवा के झोंकों से झूमते तरु,मखमली धानी चादर में लिपटी वसुधा,प्रकृति का ये अभिराम दृश्य किसके चित्त को आकर्षित नहीं करती।ऐसे ही खुशनुमा मौसम में ग्रामीण गृहिणी और अध्यापिका गीता राय”गीत” ग्राम पाली कासिमाबाद निवासिनी जो अक्सर गृहस्थ आश्रम के व्यस्तम जिंदगी में समय निकालकर अपनी अभिव्यक्ति को कविता का रूप देती हैं।उन्हीं की ए स्वरचित कविता…..

” रिमझिम बरसा सावन”

बहुत दिनों से तृषित धरा
आज तृप्त सी लगती है।
हरी चुनरिया ओढ़कर
प्रिय घन से मिलने निकली है।

स्वागत में झुक गये तरु भी
मंजरियाँ कुछ गीत सुनाती हैं।
दादुर , झींगुर भी निज स्वर मे
नीरद को पास बुलाते हैं।

चातक देख रहा है कुछ
स्वाति बूँद की आशा मे।
निकल पड़ा है कृषक दल अब
खेतों के अभिनंदन मे।

धान रोपती बालाएं कुछ
कजरी के बोल सुनाती हैं।
पर पसार अब नर्तन करते
शिखि झुंड देख ये घटा मनोहर

अंजलि भर भर शुभ्र वारि
बाल सखा सब बिहस रहे
संध्या बेला जान विहग सब
हो कतारबद्ध मचल रहे

मध्य घटा से झांक रहा
शशि भी कुछ शरमाया सा
आँख मिचौनी खेल रहा
सूरज भी अलसाया सा।।

श्यामल हाथों की मेंहदी
रच रच कर कुछ कह जाती हैं।
बचपन की गलियों से कुछ
स्मृतियाँ संग रह जाती हैं।।

उर कँपा देती यह दामिनी
प्रचण्ड मेघ की गर्जन संग
“गीत” का अन्तस डोल रहा
सावन के हिंडोले संग ……।

रिपोर्ट : संवाददाता

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